अपना मोर्चा उपन्यास में युवा वर्ग की संघर्षशील चेतना
DOI:
https://doi.org/10.64758/qchaxt45Keywords:
अपना मोर्चा, काशीनाथ सिंह, भाषा आंदोलन, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, छात्रसंघAbstract
अपना मोर्चा उपन्यास काशीनाथ सिंह द्वारा लिखा गया है यह उपन्यास आंदोलनकारी होने के साथ-साथ सामाजिक, आर्थिक, और राजनीतिक समस्याओं को भी दर्शाता है अपना मोर्चा उपन्यास में बनारस की हिंदू विश्वविद्यालय और वहा के लोगों के जीवन पर निर्भर है हिंदू विश्वविद्यालय में छात्र कैसे अनेक समस्याओं का सामना करते हैं उनकी परीक्षाओं में बेईमानी और छात्रो के साथ पक्षपात आदि समस्याओं का बहुत सुंदर चित्रण किया गया है बी॰एच॰यू॰ के सभी छात्र एक साथ मिलकर ब्रिटिश शासन के विरुद्ध आंदोलन करते हैं जिसमें छात्रों पर बहुत से अत्याचार होते हैं नेता लोग आम जनता पर राजनीति के नाम पर अत्याचार करते हैं गरीब लोग कैसे शोषण का शिकार बन रहे हैं अपना मोर्चा उपन्यास में इन सभी समस्याओं को उजागर किया गया है।अपना मोर्चा में युवा वर्ग का सामाजिक और आर्थिक संघर्ष
अपना मोर्चा उपन्यास में युवा वर्ग के सामाजिक संघर्ष का सशक्त चित्रण किया गया है। उपन्यास में जाति, वर्ग, रंग और आर्थिक स्थिति के आधार पर लोगों के साथ भेदभाव किया जाता है। जिससे युवाओं में असंतोष और संघर्ष की भावना पैदा होती है।
भ्रष्टाचार: भ्रष्टाचार युवा वर्ग के सामने एक बड़ी समस्या के रूप में उभरता है। राजनीतिक नेता अपने स्वार्थ के लिए आम जनता का शोषण करते हैं तथा गरीब और मजदूर वर्ग को उनके अधिकारों से वंचित रखते हैं। मजदूरों को उनकी उचित मूल्य की आय नहीं दी जाती। और उन पर अत्याचार किए जाते हैं।
शिक्षा व्यवस्था: उपन्यास में Banaras Hindu University की शिक्षा व्यवस्था की कमियों को भी उजागर किया गया है। शिक्षा प्रणाली में व्याप्त अव्यवस्था, पक्षपात और अन्य समस्याओं के कारण छात्रों को अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इन परिस्थितियों के विरुद्ध युवा वर्ग संघर्ष करता है और अपने अधिकारों तथा सामाजिक न्याय की मांग करता है। इस प्रकार अपना मोर्चा उपन्यास युवा वर्ग के सामाजिक संघर्ष, जागरूकता और परिवर्तन की आकांक्षा को प्रती ढंग से प्रस्तुत करता है।
